बिना मुहब्बत जीना मुश्किल सा

Law life aur multigyan
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Poetry


बिना मुहब्बत जीना मुश्किल सा हो जायेगा ऐसा कभी सोचा ना था

मुहब्बत के जहां में जानें का कभी इरादा ना था

हम हो गयें जानें कब काबू में मुहब्बत के

हमारा दिल कभी मुहब्बत का ऐसा दिवाना तो ना था

सुना है ये बदनाम करती है,इश्क का ग़म देकर जीना हराम करती है

हम खुद ही हो जायेंगे इसके गुलाम ऐसा सोचा ना था

होकर खुद मुहब्बत के गुलाम खुद को ही खो देंगे ऐसा सोचा ना था

ये मुहब्बत का एहसास भी बडा अनोखा सा है

इसमें पड़ कर लगता सब धोखे सा है

हम भी हो जायेंगे इसके धोखे में ऐसा सोचा ना था

 बिना मुहब्बत के जीना हो जायेगा ऐसा दुश्वार ऐसा सोचा ना था

 



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