Poetry
उस राह पर अब हम जातें नहीं
जहाँ तुझसे अलग हुयीं थी राहें हमारी
तुम चले गये अपनी कोई खबर ना दी
हमें दे गये दिल के दर्द की बिमारी
ना हो किसी की मुहब्बत का हश्र ऐसा
मुहब्बत में हश्र हुआ मेरा जैसा
ये किसी की बद्दुआ का नतिजा था
या मुहब्बत ने खुद ही गद्दारी की
हम जान ना सकें हमारे किस रवैये ने तुमसे ऐसी गद्दारी की
जितने हुये थे अमीर हम तेरी मुहब्बत को पा कर
हो गयें उससे लाख गुना गरीब तुमसे दूर जाकर
अब ना हमारे जागनें में कोई असर है ,ना सो जाने में सुकून है
थे तुम ही वजह सुकून की ,अब सुकून वजह भी मुझसे दूर है


