आज फिर उसकी यादें

Law life aur multigyan
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Poetry


आज फिर उसकी यादें क्या ख़ता कर गयीं

हैं जवाब नहीं मेरे पास जिसके, वो सारे सवाल कर गयीं

क्या कहें की वो यादें क्या किस हद तक हमें तबाह करतीं हैं

हम ना कर पायें जितना खुद को आबाद 

उसकी यादें हमें उतना बर्बाद करतीं हैं

ना ले सकें ग़म हम अपने दिल पर

पर इस दर्द से हम दूर भी तो ना रहें

जो सुन रखीं थीं दास्तां सारी मुहब्बत की

वो सभी बस सुने से किस्से ही रहे़

क्या कहें उसकी यादें हमें ग़म देकर गयीं

हमें देखकर यादों में घायल, हमारे हाल पर मुस्कुरा कर गयीं

कुछ जख्म जो अब भर चुकें थें

उन सबको कुरेद कर गयीं

आज फिर उसकी यादें क्या ख़ता कर गयीं






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