Poetry
रखना हौसला बस ,ये आसमान भी झूकेगा
एक बार जो आ गयी जिन्दगी की अदा
फिर भला तू क्यों रुकेगा
जो मंजिल आज बिहड़ के पार बसी है
कल हौसला तेरा उसपे खुद का कब्जा़ करेगा
आज जो आसमान ऊँचाईं पर बसा है
कल तेरे सजदे में वो ज़रूर झूकेगा
ये वक्त है दर्द को भुला देने का,खुद को नई सौगात देने का
जो कल का गिरा आज तू सम्भलेगा
तेरी ये जि़द ये वक्त भी देखेगा
ज़रुरत एक लम्बी छलांग की है,ये वक्त की जायज़ मांग सी है
जो आज तू अपनी राहों को मंजिल की ओर मोडे़गा
तू इस वक्त पे छाप अपनी छोड़गा
मिट जायेगी थकान सारी उस वक्त
जब तू खुद की जीत को देखेगा
रखना हौसला बस, ये आसमान भी झूकेगा


