उन किस्सों का क्या जिन्हे तुम

Law life aur multigyan
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Poetry



उन किस्सों का क्या जिन्हे तुम अधूरा छोड़ कर गये 

  उस दिल का क्या जिसे तोड़ कर गये

हमें आदत थी अकेले जीने की, राहों पर अकेले चलनें की

अब उस दर्द का क्या करें जो तुम दे कर गये

मरनें का इरादा ना था हमें तुम मार कर गये

अब सम्भलतें नहीं जज्बात हमारे

अब बनाये बात बनती नहीं

प्यास जो है तेरे मुहब्बत की,वो कोशिशों के बाद भी बुझती नहीं

हम खुद से खुद का पीछा छुडा़ लें

पर तेरी आदत छूटती नहीं

हम क्या करें उन ख्वाबों का जो तुम सजा कर गये

हमें तो आदत थी जीनें की, तुम हमें मार कर गये







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