Poetry
हम भूल गयें खुद को जबसे याद उन्हें करने लगे
ना लगी खबर हमको हम कब उनकी मुहब्बत में मरनें लगें
नशा तो ज़माने के सब लोग करतें हैं
पर हम ज़माने से होकर अलग मुहब्बत का नशा करनें लगें
अभी इंतजा़र की घडि़यां बाकीं हैं
पर मलाल हमें इसका होता नहीं
जबसे मुहब्बत में हम उनका इंतजा़र करनें लगें
क्या परवाह करें हम उस पल की जब यूं वक्त गुजा़र दिया
अब हर वक्त बेशकिमती सा है,जबसे खुद को उन्हें सौंप दिया
पहले महफिल में दिल लगता नहीं था
पर अब हम तन्हाई में भी खुश रहनें लगें
हमें ना लगी ख़बर हम कब उनकी मुहब्बत में मरनें लगें


